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जैसा खाय अन्न, वैसा होय मन ”

 एक बार किसी गाँव में एक महात्मा सत्संग कर रहे थे, तभी कहीं से एक चोर आकर सत्संग में बैठ गया। महात्मा के सत्संग का इतना प्रभाव हुआ कि चोर को अपने पाप कर्मों से घृणा होने लगी। सत्संग समाप्त होने के बाद चोर महात्मा के पास गया और अपने पापों के प्रायश्चित का उपाय पूछने लगा। महात्माजी ने बोल दिया – “ गंगा स्नान कर आओ, तुम्हारे पाप धुल जायेंगे।” वह चोर तो गंगा स्नान के लिए चला गया लेकिन तभी वहाँ बैठे लोगों में से एक युवक खड़ा हुआ और बोला – “ महात्माजी ! आप कहते है कि गंगा स्नान से पाप धुल जाते है तो इसका मतलब ये हुआ कि पाप गंगाजी में समा गये, मतलब गंगाजी भी पापी हो गई।” युवक की बात का महात्माजी के पास कोई जवाब नहीं था । क्योंकि उन्होंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं कि गंगाजी से पाप कहाँ जाते है ? आखिरकार इस अनूठे प्रश्न का उत्तर जानने के लिए महात्माजी तपस्या करने लगे। कई दिनों की तपस्या के बाद महात्माजी पर देवता प्रसन्न होकर प्रकट हो गये और वरदान मांगने को कहा। महात्माजी ने कहा – “ भगवन ! मुझे अपने एक प्रश्न का उत्तर चाहिए कि गंगा में धोया गया पाप कहाँ जाता है ?” देवता अपने में मग्न, उन्ह...

एक सलाह ,एक निर्णय जिसने जिंदगी बदल दी

एक फोटो कापी की दुकान पर तीन लोग दाखिल हुए : एक युवा लड़का जिसकी उम्र लगभग 22 साल थी , एक लड़की करीब 19 साल की , और उनके साथ एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति , जो लगभग 35 साल का लग रहा था।   उनकी चाल - ढाल और चेहरों पर चिंता के भाव यह साफ जाहिर कर रहे थे कि वे किसी जल्दबाजी में हैं। उन्होंने दुकानदार को अपने कुछ पहचान पत्र , जैसे आधार कार्ड , मैट्रिक सर्टिफिकेट आदि , फोटो कापी के लिए दिए। लड़की का चेहरा उतरा हुआ और उसकी आंखों में उदासी की गहरी लकीरें थीं , जो उसकी चिंता को बयां कर रही थीं। दुकानदार , जो लगभग 45 वर्ष का था और अपने अनुभवों से समृद्ध था , ने जब उनसे पूछा कि कितनी कापियां करनी हैं , तो लड़की ने धीरे से कहा , " दस - दस ही कर दीजिए। पता नहीं दुबारा करने का मौका मिले या नहीं , पता नहीं जिन्दा भी छोड़ें। " यह सुनकर साथ आया व्यक्ति , जो उस लड़की के साथ खड़ा था , उसे सांत्वना देते हुए बोला , " अरे तुम लोग चिंता मत करो , मैं...