पर-हित

 पर-हित


एक भारतीय व्यक्ति लंदन में अपने एक मित्र के घर ठहरा हुआ था।उसका मालिक दूध बांटता था। एक दिन उसकी लड़की बहुत उदास थी। भारतीय मित्र ने पूछा,'बहन! आज इतनी उदास क्यों हो?' वह बोली,'क्या करूँ, दूध की सप्लाई तो पूरी करनी है और मेरे पास आज दूध कम है। बड़ी चिंता हो रही है कि मैं सप्लाई कैसे कर पाऊंगी?' उसने कहा,'यह इतनी चिंतित और इतनी उदास होने की बात नहीं है। वैसे भी तुम्हारे पास तो इतना दूध है,थोड़ा-सा पानी मिला दो,तुम्हारी समस्या खत्म हो जाएगी। यह सुनते ही वह अपने पिता के पास जाकर बोली,'किस दुष्ट को आपने घर में ठहराया है?वह तो ऐसी बुरी सलाह देता है कि दूध में पानी मिला दो। क्या मैं ऐसा कर अपने राष्ट्र के नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति अन्याय करूँ? ऐसी सलाह देने वाले को घर से निकाल दो।'
      हद से ज्यादा स्वार्थीपन और एक -दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कई बार लोगों को यह पता नहीं चलता कि वे कब भ्रष्ट,अमानवीय और अराजक हो जाते हैं।

सीख-: अपने स्वार्थों के लिए दूसरों का अहित न करें।

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है-पर्याप्त है।

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